कर्नाटक हाईकोर्ट ने विनज़ो की सहायक कंपनी Zo की याचिका पर सवाल उठाए। Zo ने कोर्ट से कहा कि कर्मचारियों के वेतन जारी करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने ED के कदमों में समय की गड़बड़ी (timeline discrepancy) को भी देखा, जो ED की कार्रवाई को गलत साबित कर सकती है।

Zo ने बताया कि जब विनज़ो के खिलाफ ECIR दर्ज हुआ और मूल कंपनी के खाते फ्रीज हो गए, तब बोर्ड ने निर्णय लिया कि संचालन और वेतन देने की जिम्मेदारी सहायक कंपनी Zo को दे दी जाए। Zo ने कहा कि वह कर्मचारियों के वेतन दे सकती है और इससे कोई दिक्कत या दोहराव नहीं होगा।

ED ने इसका विरोध किया और कहा कि Zo हाल ही में (मई 2023) बनी है और उसके पास इतने कर्मचारियों या पैसे का आधार नहीं है। ED ने यह भी कहा कि PMLA की धारा 17 के तहत फ्रीज किए गए खाते खोलने या पैसे जारी करने का फैसला केवल संबंधित प्राधिकारी कर सकता है।

मुख्य मुद्दा यह है कि क्या ED ने धारा 17(1A) का सही पालन किया या नहीं। कोर्ट ने ED की कार्रवाई में कुछ खामियां पाई हैं, जो इसे अमान्य भी कर सकती हैं।

स्रोत: Bar & Bench

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